पत्नी की आखिरी इच्छा पूरी करने को गहने बेचकर जुटाए 7 लाख रुपए, राम मंदिर निर्माण के लिए किया दान

राम मंदिर को लेकर पूरा देश जोर शोर से अपना सहयोग दे रहा है। ऐसे में पूरे देश से सहयोग निधि एकत्रित की जा रही है। देशवासी अपने समर्पण अनुसार मंदिर निर्माण के लिए राशि भेंट कर रहे हैं। लेकिन जोधपुर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां की एक महिला की आखिरी इच्छा की पूर्ति के लिए उनके निधन के बाद उनके परिवार वालों ने उनके आभूषण बेचकर राम मंदिर के निर्माण के लिए 7 लाख रुपए से भी अधिक राशि समर्पण निधि हेतु भेंट किया है।

पत्नी की आखिरी इच्छा पूरी करने को गहने बेचकर जुटाए 7 लाख रुपए, राम मंदिर निर्माण के लिए किया दान

खबर के मुताबिक जोधपुर की टीम के प्रमुख हेमंत गोष्ट के पास एक फोन आया,फोन करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम विजय सिंह गौड़ बताया। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी आशा कंवर का देहांत हो चुका है। उनकी पत्नी की आखिरी ख्वाहिश यही थी कि उनके सभी आभूषण राम मंदिर निर्माण के लिए दे दिए जाएं । और उनकी इच्छानुसार उनके सभी आभूषण राम मंदिर निर्माण निधि में भेंट स्वरूप देना चाहते हैं। जब हेमंत बिष्ट को यह बात पता नहीं तो उन्होंने कहा पहले आशा कंवर जी का अंतिम संस्कार पूरा हो जाए उसके बाद उनकी आत्मा उसकी अंतिम इच्छा को पूरा कर लीजिएगा।

पत्नी की आखिरी इच्छा पूरी करने को गहने बेचकर जुटाए 7 लाख रुपए, राम मंदिर निर्माण के लिए किया दान

बता दें कि जोधपुर में रहने वाली आशया कंवर जी का देहांत पिछले दिनों उनकी बीमारी के कारण हो गया। 54 वर्ष की उम्र में आशा कंवर जी का निधन हो गया। निधन से पहले बीते 1 फरवरी को ही आशा जी ने अपने पति विजय सिंह और बेटे के समक्ष अपनी यह आखिरी इच्छा व्यक्त की थी। इनका परिवार मध्यमवर्गी है फिर भी आशा जी की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनके पति ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करने का संकल्प किया है।

आशा जी कुछ समय पहले कोरोना से संक्रमित हो गई थी। लेकिन कुछ समय पहले ही वे इससे उबर गई थीं। बीते 3 फरवरी को वे रेगुलर चेकअप के लिए दुबारा हॉस्पिटल गई थीं। वहाँ पर फेफड़ों के संक्रमण के लिए उन्हें भर्ती कर लिया गया था। और इसके अगले ही दिन उनका देहांत फेफड़ों के संक्रमण के कारण हो गया।

पत्नी की आखिरी इच्छा पूरी करने को गहने बेचकर जुटाए 7 लाख रुपए, राम मंदिर निर्माण के लिए किया दान

आशा जी घर श्री राम समर्पण निधि अभियान के कार्यकर्ता पहुँचें। वहां पर परिवार जनों ने विस्तार से आशा कंवर जी की आखिरी इच्छा के बारे में बताया। आशा कंवर जी के गहनों को बेचने से 7 लाख 8 हजार रुपए प्राप्त हुए थे जिसे की मंदिर निर्माण के कार्य हेतु समर्पित कर दिया गया। आशा जी की राम भक्ति अनूठी थी।

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