5 महीने की बेटी को गोद में लेकर रोज 165 KM सफर खड़े खड़े करती है ये माँ स्टोरी भावुक कर देगी

कहा जाता है मां से बड़ा कोई भी युद्ध नहीं होता। मां की सामर्थता किसी परिचय की मोहताज नहीं है । ऐसा ही एक प्रेरणादायक किस्सा गोरखपुर की रहने वाली शीला दीक्षित का है। शिप्रा परिवहन निगम गोरखपुर के डिपो में बस कंडक्टर हैं। शिप्रा को अपनी इस नौकरी से कोई भी और किसी भी प्रकार की शिकायत नही है। लेकिन पिछले कुछ समय से शिप्रा अपनी 5 महीने की बेटी को गोद में लेकर 165 तय करती हैं। शिप्रा के इस संघर्ष की वहज है विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शिप्रा की चाइल्ड केयर लीव की अर्जी को ठुकरा दिया जाना।

5 महीने की बेटी को गोद में लेकर रोज 165 KM सफर खड़े खड़े करती है ये माँ स्टोरी भावुक कर देगी

शिप्रा को रोज अपनी 5 महीने की बेटी को गोद मे लेकर 165 किलो मीटर का सफर तय करना पड़ता है। वे अपनी बच्ची को गोद मे लिए लिए ही यात्रियों की टिकट काटने का कार्य करती हैं। शिप्रा बच्ची के लाख भूखे होने पर भी उसे दूध नही पिला पातीं। बस में हवा लगने के कारण बच्ची कई बार बीमार भी पड़ चुकी है।

5 महीने की बेटी को गोद में लेकर रोज 165 KM सफर खड़े खड़े करती है ये माँ स्टोरी भावुक कर देगी

बच्ची की यह हालत देख बस में सफर करने वाले यात्रियों को दया आ जाती है। लेकिन अभी तक विभाग के अधिकारियों को दया नही आई है। इतने सब के बाद भी अभी तक शिप्रा को छुट्टी मंजूर नहीं कि गई है।

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घर पर बच्ची को सम्हालने वाला कोई भी नही है यही कारण है कि शिप्रा को अपनी बच्ची के साथ ही ड्यूटी पर आना पड़ता है। शिप्रा के पिता उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में थे। उनके निधन के बाद अब शिप्रा को यह नौकरी अनुकम्पा के आधार पर प्राप्त हुई है। शिप्रा के पिता सीनियर एकाउंटेंट थे। शिप्रा ने भी विज्ञान से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रखा है। लेकिन उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार पद नही प्राप्त हुआ है।

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शिप्रा का कहना है कि परिवार की परिस्थिति बहुत खराब होने के कारण विवशता में उन्हें यह नौकरी करनी पड़ी। उनके परिवार ने कमाने वाला दूसरा को भी नही था। लेकिन उन्हें न तो अभी तक प्रोमोशन मिला है न ही चाइल्ड केयर लीव मिली है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के पास भी शिप्रा ने गुहार लगाई है। उनकी यह मांग है की उन्हें उनकी योग्यता और पिता के पद अनुसार विभाग में नौकरी प्रदान की जाए।

बता दें कि शिप्रा के पति दिल्ली में सॉफ्टवेयर कम्पनी में कार्यरत थे। लेकिन कोरोना के कारण उनकी जॉब छूट चुकी है। उनका भी यही मानना है कि पत्नी शिप्रा को चाइल्ड केयर लीव मिल जानी चाहिये। बच्ची कई बार बीमार हो चुकी है।

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