घर बनवाते या लेते समय रखें इन बातों का ध्यान, हमेशा बनी रहेगी घर में सुख- समृद्धि

दोस्तों सदियों से हमारे भारतीय संस्कृति में कभी भी भवन निर्माण या महल निर्माण,मंदिर निर्माण,होता था तो सर्वप्रथम हमारी संस्कृति के अनुसार वस्तु शाश्त्र का उपयोग किया जाता था ताकि सदियों तक घर,महल,मंदिर में खुशाली आये और तरक्की होती रहे,अगर आज के आधुनक युग ने हम से हमारी पहचान और नियम, भुला दिए है,मगर कुछ लोग ही है जो अपना घर,ऑफिस,कारखाना,सही सही वास्तु के इस्तेमाल से निर्मित करवाता है जिसका परिणाम वो खुशाल जिंदगी और तरक्की की सीढ़ी चढ़ता रहता हैं,

आजकल के व्यस्त शहरी जीवन और तड़क-भड़क की जिन्दगी में हम नियमों को ताक में रखकर मनमाने ढंग से घर या मकान का निर्माण कर लेते हैं। जब भारी लागत लगाने के बावजूद भी घर के सदस्यों का सुख चैन गायब हो जाता है, तब हमें यह आभास होता है कि मकान बनाते समय कहां पर चूक हुई है। अतः मकान बनाने से पहले ही हम यहां पर कुछ वास्तु टिप्स दे रहे हैं, जिनका अनुशरण करके आप अपने घर-मकान, दुकान या कारखाने में आने वाली बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं ।हमारे रहन सहन में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व है। कई बार हम सभी प्रकार की उपलब्धियों के बावजूद अपने रोजमर्रा की सामान्य जीवन शैली में दुखी और खिन्न रहते हैं। वास्तु दोष मूलतः हमारे रहन सहन की प्रणाली से उत्पन्न होता है। प्राचीन काल में वास्तु शास्त्री ही मकान की बुनियाद रखने से पहले आमंत्रित किए जाते थे और उनकी सलाह पर ही घर के मुख्य द्वार रसोईघर, शयन कक्ष, अध्ययन शाला और पूजा गृह आदि का निर्णय लिया जाता था।

वास्तु शास्त्र के सिद्धांत सिर्फ घर पर ही नहीं बल्कि ऑफिस व दुकान पर भी लागू होते हैं। यदि दुकान या ऑफिस में वास्तु दोष हो तो व्यापार-व्यवसाय में सफलता नहीं मिलती। किस दिशा में बैठकर आप लेन-देन आदि कार्य करते हैं, इसका प्रभाव भी व्यापार में पड़ता है। यदि आप अपने व्यापार-व्यवसाय में सफलता पाना चाहते हैं नीचे लिखी वास्तु टिप्स का उपयोग करें-


वास्तु शास्त्रियों के अनुसार चुंबकीय उत्तर क्षेत्र कुबेर का स्थान माना जाता है जो कि धन वृद्धि के लिए शुभ है। यदि कोई व्यापारिक वार्ता, परामर्श, लेन-देन या कोई बड़ा सौदा करें तो मुख उत्तर की ओर रखें। इससे व्यापार में काफी लाभ होता है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है कि इस ओर चुंबकीय तरंगे विद्यमान रहती हैं जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएं सक्रिय रहती हैं और शुद्ध वायु के कारण भी अधिक ऑक्सीजन मिलती है जो मस्तिष्क को सक्रिय करके स्मरण शक्ति बढ़ाती हैं। सक्रियता और स्मरण शक्ति व्यापारिक उन्नति और कार्यों को सफल करते हैं। व्यापारियों के लिए चाहिए कि वे जहां तक हो सके व्यापार आदि में उत्तर दिशा की ओर मुख रखें तथा कैश बॉक्स और महत्वपूर्ण कागज चैक-बुक आदि दाहिनी ओर रखें। इन उपायों से धन लाभ तो होता ही है साथ ही समाज में मान-प्रतिष्ठा भी बढ़ती है।
किचन के लिए वास्तु टिप्स—–


महिलाओं का अधिकतम समय किचन में ही बीतता है। वास्तुशास्त्रियों के मुताबिक यदि वास्तु सही न हो तो उसका विपरीत प्रभाव महिला पर, घर पर भी पड़ता है। किचन बनवाते समय इन बातों पर गौर करें।

—किचन की ऊँचाई 10 से 11 फीट होनी चाहिए और गर्म हवा निकलने के लिए वेंटीलेटर होना चाहिए। यदि 4-5 फीट में किचन की ऊँचाई हो तो महिलाओं के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। कभी भी किचन से लगा हुआ कोई जल स्त्रोत नहीं होना चाहिए। किचन के बाजू में बोर, कुआँ, बाथरूम बनवाना अवाइड करें, सिर्फ वाशिंग स्पेस दे सकते हैं।

—किचन में सूर्य की रोशनी सबसे ज्यादा आए। इस बात का हमेशा ध्यान रखें। किचन की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि इससे सकारात्मक व पॉजिटिव एनर्जी आती है।

—- किचन हमेशा दक्षिण-पूर्व कोना जिसे अग्निकोण (आग्नेय) कहते है, में ही बनवाना चाहिए। यदि इस कोण में किचन बनाना संभव न हो तो उत्तर-पश्चिम कोण जिसे वायव्य कोण भी कहते हैं पर बनवा सकते हैं।

—- किचन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्लेटफार्म हमेशा पूर्व में होना चाहिए और ईशान कोण में सिंक व अग्नि कोण चूल्हा लगाना चाहिए।

—- किचन के दक्षिण में कभी भी कोई दरवाजा या खिड़की नहीं होने चाहिए। खिड़की पूर्व की ओर में ही रखें।

—- रंग का चयन करते समय भी विशेष ध्यान रखें। महिलाओं की कुंडली के आधार पर रंग का चयन करना चाहिए।

—- किचन में कभी भी ग्रेनाइट का फ्लोर या प्लेटफार्म नहीं बनवाना चाहिए और न ही मीरर जैसी कोई चीज होनी चाहिए, क्योंकि इससे विपरित प्रभाव पड़ता है और घर में कलह की स्थिति बढ़ती है।

— किचन में लॉफ्ट, अलमारी दक्षिण या पश्चिम दीवार में ही होना चाहिए।
— पानी फिल्टर ईशान कोण में लगाएँ।

—- किचन में कोई भी पावर प्वाइंट जैसे मिक्सर, ग्रांडर, माइक्रोवेव, ओवन को प्लेटफार्म में दक्षिण की तरफ लगाना चाहिए। फ्रिज हमेशा वायव्य कोण में रखें।
पूजा घर के लिए वास्तु टिप्स—


घर में अन्य इन्टीरियर के अलावा पूजा घर या पूजा स्थल का भी अपना महत्व होता है। इसकी दिशा-दशा का ध्यान रखना अति आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार पूजा रूम के लिए घर का उत्तर-पूर्व कोना अच्छा होता है। क्योंकि यह ईशान अर्थात् ईश्वर का स्थान होता है। दक्षिण में तो पूजा रूम कतई नहीं होना चाहिए।

– किसी भी मूर्ति को पूजा रूम के पूर्व या पश्चिम में रखना चाहिए। इसे उत्तर या दक्षिण दिशा की ओर नहीं रखना चाहिए जिससे की पूजा करते समय मुंह पूर्व या पश्चिम की ओर रहे।

– घर के पूजा रूम में रखी जाने वाली मूर्तियों का आकार तीन इंच से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

– मूर्तियों या तस्वीरों को आमने सामने नहीं रखना चाहिए। मूर्ति यदि टूटी फूटी हो या उसमें किसी प्रकार की दरार हो तो उन्हें पूजा घर में ना रखें।

– मूर्तियां संगमरमर या लकड़ी की अच्छी होती है तथा मूर्तियां रखने के लिए प्लेटफार्म लकड़ी की सबसे अच्छी होती है।
-दीवारों के रंग के लिए सफेद, क्रीम या हल्के नीले रंग का प्रयोग करना चाहिए।

– रसोईघर तथा बाथरूम के साथ लगे पूजा घर नहीं बनवाएं।

– पूजा रूम घर के अंदर ग्राउंड फ्लोर पर सही होता है। बेसमेंट या पहली मंजिल पर नहीं।
– देवी-देवताओं की मूर्तियों या तस्वीरों में उनका चेहरा साफ-साफ नजर आना चाहिए। फूल माला आदि किसी भी चीज से चेहरा ढका नहीं होना चाहिए।

-यदि छोटा घर हो तो पूजा की जगह बच्चों के बेडरूम में उत्तर पूर्व कोने में बनवायें।

– पूजारूम का दरवाजा लकड़ी का ही होना चाहिए। और खिड़की पूर्व या उत्तर दिशा में बनवायें।

-पूजा रूम में चीजें रखने की आलमारी की जगह पश्चिम या दक्षिण में ही निर्धारित करें।

– पूजा रूम से हटाया गया कोई भी सामान चाहे वह मूर्ति हो या फूल घर के किसी और जगह पर ना रखें। ऐसी वस्तुओं को किसी नदी में प्रवाहित कर देना शुभ होता है।

इन वास्तु टिप्स से आएगी घर में सुख-शांति —


1. मकान का मुख्यस द्वार दक्षिण मुखी नहीं होना चाहिए। इसके लिए आप चुंबकीय कंपास लेकर जाएं। यदि आपके पास अन्विकल्प नहीं हैं, तो द्वार के ठीक सामने बड़ा सा दर्पण लगाएं, ताकि नकारात्मेक ऊर्जा द्वार से ही वापस लौट जाएं।

2. घर के प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक या ऊँ की आकृति लगाएं। इससे परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

3. घर की पूर्वोत्तवर दिशा में पानी का कलश रखें। इससे घर में समृद्धि आती है।

4. घर के खिड़की दरवाजे इस प्रकार होनी चाहिए, कि सूर्य का प्रकाश ज्यातदा से ज्याादा समय के लिए घर के अंदर आए। इससे घर की बीमारियां दूर भागती हैं।

5. परिवार में लड़ाई-झगड़ों से बचने के लिए ड्रॉइंग रूम यानी बैठक में फूलों का गुलदस्ता लगाएं।

6. रसोई घर में पूजा की अल्मागरी या मंदिर नहीं रखना चाहिए।


7. बेडरूम में भगवान के कैलेंडर या तस्वींरें या फिर धार्मिक आस्थाल से जुड़ी वस्तुपएं नहीं रखनी चाहिए। बेडरूम की दीवारों पर पोस्टडर या तस्वीिरें नहीं लगाएं तो अच्छा है। हां अगर आपका बहुत मन है, तो प्राकृतिक सौंदर्य दर्शाने वाली तस्वीयर लगाएं। इससे मन को शांति मिलती है, पति-पत्नी। में झगड़े नहीं होते।

8. घर में शौचालय के बगल में देवस्थानन नहीं होना चाहिए।

9. घर में घुसते ही शौचालय नहीं होना चाहिए।

10. घर के मुखिया का बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में अच्छा माना जाता है।ये हें ड्राईंग रूम के लिए वास्तु टिप्स

ड्राईंग रूम हमारी सौन्दर्यात्मक अभिरूचि और स्टेटस का प्रतीक है। आज की जीवनशैली में ड्राईंग रूम का महत्व बहुत है। आजकल अधिकतर हम ड्राईंग रूम में ही टीवी रखते और देखते हैं। भोजन करते हुए टीवी देखने की प्रवृत्ति भी बढ़ गई है, जबकि जानकारों का कहना है कि ऐसा करना अच्छा नहीं है। इस रूम में ही बैठकर हम मेहमानों के साथ या आपस में वार्ता करते हैं और जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं। लाजिमी है कि वास्तु की दृष्टि से ड्राईंग रूम का विशेष महत्व है। इस कमरे में हम दूसरे किसी भी कमरे की तुलना में ज्यादा तरह के छोटे-बड़े सामान रखते हैं। किस सामान को कहां और कैसे रखा जाए, खूबसूरती के नजरिए से इसका महत्व तो है ही, वास्तु के नजरिए से भी है। भारतीय परम्परा में सौंदर्यात्मक मानकों की वास्तु के मानकों से समानता है। ड्राईंग रूम के लिए नीचे दिए गए टिप्स पर ध्यान दें—

1. ड्राईंग रूम को पूरे मकान के उत्तर-पूर्व कोण में रखना सबसे आदर्श स्थिति है। वास्तु की शब्दावली में इसे ईशान कोण कहते हैं। पश्चिम की ओर या दक्षिण की ओर दिशा वाले मकान में ऐसा करना संभव नहीं होगा, तो उसके लिए विशेषज्ञ वास्तुकार की सलाह लें। विशेषज्ञ अन्य कमरों के बारे में आपकी योजना के साथ तुलना करते हुए ड्राईंग रूम की अपेक्षित स्थिति बताएगा।

2. कमरे में सोफे और कुर्सियों को जमाने की व्यवस्था इस प्रकार करनी चाहिए कि मकान का मालिक जब बैठे तो उसका मुख पूर्व या उत्तर की ओर हो और अन्य लोग उसकी ओर मुख करके बैठें। इससे ईशान कोण और उत्तर पूर्व कोण से आने वाली उर्जा तरंगों का अधिकतम लाभ मिलेगा, विशेषकर महत्वपूर्ण नीति-निर्णयों के मामले में।

3. अगर लम्बे सोफे को पूर्व की ओर मुख करके रखा गया है, तो मालिक इसके दक्षिण पश्चिम कोण में बैठे। अगर दोनों छोटे सोफों को पूर्व की ओर मुख करके रखा गया है, उस स्थिति में भी मालिक दक्षिण पश्चिम कोने वाले सोफे पर बैठे। इन कोण को वास्तु की शब्दावली में नैरूठी कोण कहते हैं।

4. ड्राईंग रूम अगर ईशान कोण में हो, और ड्राईंग रूम की फ्लोरिंग अगर शेष मकान से नीचे हो तो यह सबसे अधिक आदर्श स्थिति है।

5. पूर्व और उत्तार दिशा वाले मकान के लिए तो यह अच्छा है कि प्रवेश द्वार से घुसते ही पहला कमरा ड्राईंग रूम हो, पर दक्षिण और पश्चिम रूख वाले मकान के लिए ऐसा अच्छा नहीं है। ऐसे लोग वास्तु विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

6. ड्राईंग रूम में प्रवेश के दरवाजे आमतौर पर कोनों में ही होने चाहिएं। ड्राईंग रूम में प्रवेश के और इस कमरे से अन्य कमरों में प्रवेश के दरवाजे कितने और कहां-कहां रखे जाएं, इस बारे में वास्तु-विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। वास्तु में दरवाजों की स्थिति का विशेष महत्व है।

7. ड्राईंग रूम के सभी हिस्सों और सभी दीवारों की सजावट में परिवार के सभी सदस्यों के व्यक्तित्व और अभिरूचि का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। सजावट की सभी वस्तुओं के बीच एक सौंदर्यात्मक अन्विति होनी चाहिए।

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